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017. Bani Isra’iil-H

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1.Heading 2.Ayyat 3.Sub-Heading
1. N/A मेराज का वाक़िया......ज़मीनी सफ़र का बयान।
2. बनी इस्राईल के लिए इब्रत और निशानियॉं। हिदायत ए रब्बानी का लुब्बे लुबाब...अल्लाह ही पर भरोसा।
बनी इस्राईल पर उरूज और ज़वाल के दो दौर।
उरूज के हुसूल का ज़रिया।
3. तमाम इंसानों के लिए इबरत और नसीहत। अल्लाह से मईन चीज़ नहीं ,भलाई मांगें।
रात और दिन ....अल्लाह की दो रहमत भरी निशानियाॅं।
कोई चीज़ मनहूस नहीं।
क़ौमों पर अज़ाब इत्मामे हुज्जत के बाद आता है।
तय कर लें तलबगार दुनिया के हो या आख़िरत के।
4.इसलाम की माशरती हिदायत अल्लाह के बाद हक़ वालिदैन का है।
अल्लाह की राह में ख़र्च करने के हवाले से हिदायतें।
माल, जान और आबरू की हिफाजत के लिए हिदायतें।
इल्म की फ़ज़ीलत।
अपनी औकात पहचानो।
अल्लाह का हर हुक्म हिकमत से भरा है।
5..मुश्रिकीन ए मक्का के साथ कशमकश अल्लाह की बुलंद शान।
सरदाराने क़ुरैश की महरूमी।
आख़िरत के हवाले से तीन तंज़िया सवाल।
इंसान की खुश कलामी शैतान की नाकामी है।
अल्लाह तमाम इंसानों के हाल से वाकिफ है।
अल्लाह के महबूब बंदों का हाल।
दुनिया की हर बस्ती फ़ना होकर रहेगी।
फ़रमाइशी मोज्ज़ा ना दिखाने की हिकमत।
आयात ए मुतशाबिहात।
6. N/A इब्लीस की इंसान से दुश्मनी।
7. अल्लाह के एहसान और बंदों की नाशुक्री। अल्लाह के एहसान ….. इंसानों की नाशुक्री।
अल्लाह ने इंसान को अश्रफ़ुल मख़्लूक़ात बनाया है।
8. मुश्रिकीन ए मक्का के साथ कशमकश। जान बूझकर सरकशी करने वाला कयामत के दिन अंधा होगा।
काफ़िरों को दुश्मनी नबी ﷺ से नहीं क़ुरआन से है।
हिजरत का मरहला आने वाला है।
पंज वक्ता नमाजों का हुक्म।
हिजरत गल्बा ए दीन का आगाज़ है।
उरूज और ज़वाल क़ुरआन से वाबस्ता है।
दुनिया के हालात का तास्सुर (अस्रात)मत लो।
रूह की हकीकत अल्लाह ही जानते हैं।
नबी-ए-अकरम ﷺ पर अल्लाह का सबसे बड़ा फ़ज़ल....नुज़ूल ए क़ुरआन।
क़ुरआन जैसा कलाम कोई नहीं पेश कर सकता।
फ़रमाइशी मोज्ज़ों की फ़हरिस्त।
तमाम रसूल इंसान ही थे।
गुमराहों का अलमनाक अंजाम।
9.बनी इस्राईल का माज़ी(अतीत) और मुसतक़बिल(भविष्य)। फ़िरऔन की हट धर्मी और बरबादी।
कयामत के करीब यहूद एक मुकाम पर जमा कर दिये जायेंगे।
10. N/A क़ुरआन मजीद की अज़मत और तासीर।
11. तौहीद ए बारी ताला सारे अच्छे नाम और सिफ़ात अल्लाह ही के पास है।
तौहीद ए बारी ताला का ख़ज़ाना।
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