my quran journey

016. An Nahl-H

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1.Heading 2.Ayyat 3.Sub-Heading
1. अल्लाह की कुदरतें और नेमतें। मुश्रिकीन के लिए दोटोक एलान।
अल्लाह की तख़्लीक़ के तीन शाहकार।
चौपाए अल्लाह की कितनी बड़ी नेमत हैं।
पानी की बरकतें।
जहान है तेरे लिए तू नहीं है जहान के लिए।
कायनात की ज़ीनत रंगा रंगी से है।
इंसानों के लिए समुद्री बरकतें।
ज़मीन पर मज़ाहिर ए कुदरत।
ख़ालिक़ के बराबर कोई नहीं हो सकता है।
2. 2.मुश्रिकीन ए मक्का के साथ कशमकश तुम अल्लाह की नेमतें शुमार नहीं कर सकते।
अपने जैसे इंसानों को माबूद ना बनाओ।
गुमराही फैलाना गुनाह ए जारिया है।
अल्लाह का एसा अज़ाब जिसका गुमान तक ना था।
कब्र जहन्नुम के गढों में से एक गढ़ा हैं।
सबसे बडी ख़ैर अल्लाह की किताब क़ुरआन करीम है।
कब्र जन्नत के बाग में से एक बाग हैं।
नाफ़रमानों को किस बात का इंतजार है?
शिर्क के लिए खुशनुमा जवाज़।
रसूलों की दावत.... अल्लाह की इबादत और ताग़ूत से बगावत।
अल्लाह झूठों को घर तक पहुंचाएगा।
अल्लाह की राह में हिजरत की फ़ज़ीलत।
हदीस ,क़ुरआन की वज़ाहत करती हैं।
अल्लाह के अज़ाब से हर वक्त डरते रहो।
हर चीज़ ही नहीं बलकी उसका साया भी अल्लाह को सजदा करता है।
दो माबूद ना बनाओ।
हर नेमत अल्लाह ही की देन है।
.मुश्रिकीन ए मक्का की बेइंसाफ़ी।
अल्लाह की रहमत ना होती तो हम तबाह हो जाते।
सौ सौ गुनाह किये तेरी रहमत के ज़ोर पर।
क़ुरआन की फ़ैसलाकुन वज़ाहत....हदीस ए नबवी ﷺ।
3. अल्लाह की कुदरतें और नेमतें। अल्लाह की नेमत चार मश्रूबात(पीने की चीज़) के रूप में।
इंसान की बेबसी।
शिर्क की नफ़ी एक वाज़ह मिसाल है।
अल्लाह के एहसान और बंदों की नाशुक्री।
दो बलीग़ मिसालें।
अल्लाह की बेमिसाल कुदरतें और नेमतें।
4. ईमान बिल आख़िरत। उम्मत के खिलाफ़ रसूलों की गवाही।
न पर तकिया था वही पत्ते हवा देने लगे।
नबी-ए-अकरम ﷺ की उम्मत के खिलाफ़ गवाही।
5.अहम हिदायात ए रब्बानी। अल्लाह की पसंद और नापसंद।
मुआहदे(वादे) की पासदारी का हुक्म।
आर्ज़ी मफ़ादात के लिए मुआहदे का सौदा ना करो।
पाकीज़ा ज़िंदगी.....अल्लाह का इनाम।
शैतान का वार किस पर कारगर होता है?
6. मुश्रिकीन ए मक्का के साथ कशमकश। क़ुरआन मजीद पर एतराज़ का जवाब।
मुरतद की मज़म्मत।
अभी इश्क के इम्तेहान और भी हैं।
कयामत के दिन हर एक को अपनी पड़ी होगी।
क़ुरआन में पाकिस्तान का ज़िक्र।
7. N/A हलाल और हराम के हवाले से हिदायत।
8. अज़मत ए इब्राहीम अलैहिस्सलाम यहूदियों के लिए सज़ा।
हज़रत इब्राहीम अलैहिस्सलाम अपनी ज़ात में एक उम्मत थे।
अल्लाह के नज़दीक अफ़ज़ल दिन जुम्मा है, सबत(शनिवार) नहीं।
9. सबर और इस्तेक़ामत की ताक़ें दावत ए दीन की तीन सतहें।
सबर और तक़्वा की अहमियत।
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