my quran journey

003. Al Imran-H

3
1.Heading 2.Ayyat 3.Sub-Heading
(पहला हिस्सा 1. तमहीद ज़ात व सिफ़ाते बारी ताला।
फ़ितने पैदा करने वालों का तर्ज़े अमल।
फ़्फार के लिये वईद।
दुनिया बमुक़ाबिल आख़िरत।
अल्लाह की शान-ए-ख़ास........क़याम-ए-अदल।
अल्लाह के नज़दीक दीन सिर्फ इसलाम है।
इसलाम का रास्ता ही हिदायत का रास्ता है।
अहले किताब के जुर्म।
अल्लाह की अज़मतों का बयान।
मूमिन काफ़िरों को मोमिनों के मुक़ाब्ले में दोस्त ना बनाए।
अल्लाह इन्सान के ज़ाहिर और बातिन से वाख़िफ है।
अल्लाह की मुहब्बत इत्तेबा -ए-रसूल ﷺ से हासिल होगी।
इतात-ए-रसूलﷺ से एराज़ (मुह मोढ़ना) कुफ्र है।
2. नज्रान के ईसाइयों से ख़िताब और उनकी गुमराही का तसव्वुर। आल -ए-इमरान पर इनायते रब्बानी।
हज़रत यहया अलैहिस्सलाम की मोज्ज़ाना विलादत( जन्म)।
हज़रत मर्यम की तमाम औरतों पर फ़ज़ीलत।
हज़रत ईसा अलैहिस्सलाम का मोज्ज़ाना जन्म और उनके मोज्ज़ात।
हज़रत ईसा अलैहिस्सलाम की दावत और बनी इस्राईल का रद्दे अमल
हज़रत ईसा अलैहिस्सलाम का रफ़ा -ए-आसमानी।
हज़रत ईसा अलैहिस्सलाम की मिसाल हज़रत आदम अलैहिस्सलाम की तरह है।
3. तहवील -ए-उम्मत का मज़मून। अहले किताब को दावत।
अहले किताब की मुसलमानों से दुश्मनी।
शऊरी मुनाफ़िक़त.........यहूद की साजिश।
अहलेे किताब में नेक लोग भी हैं।
यहूद का अल्लाह की किताब में तहरीफ़ करना (बदलना)।
नबी के लिए इमकान नहीं के वो शिर्क की तालीम दें।
बिया इक्राम अलैहिस्सलाम से अह्दे ख़ास।
पूरी कायनात का दीन इसलाम है।
हर नबी पर ईमान लाना ज़रूरी है।
इसलाम के सिवा और कोई दीन काबिल-ए-क़ुबूल नहीं।
की का अव्वल मज़हर........महबूब चीज़ का इन्फ़ाक़(खर्च करना)।
मन घडन्त बात अल्लाह की तरफ मन्सूब करना ज़ुल्म है।
बे की अज़मत और हज की फ़र्ज़ियत।
अहलेे किताब की मुसलमानों से दुश्मनी।
(दूसरा हिस्सा 1. अहले ईमान के लिए हिदायत और अहले किताब की मुसलमानों से दुश्मनी फौज़ व फ़लाह(कामयाबी )के लिए निकाती लाहे अमल।
रोज़ ए कयामत कुछ चेहरे रौशन और कुछ स्याह होंगे।
मकसदे उम्मत....अम्र बिल मारूफ(नेकी का हुक्म देना), नहीं अनिलमुनकर(बुराई से रोकना)।
उम्मत ज़लील और रुस्वा क्यों होती है।
ज़लील और रुस्वा उम्मत में भी सालिहीन का गिरोह होता है।
अहले किताब दुश्मन हैं,उनसे दोस्ती मत करो।
2. Gaszwa-E-Uhad: Muslmano pe Tankid "Lesson for the Future" अल्लाह की तरफ़ से मदद की बशारत(खुश खबरी)।
हिदायत देने का इख्तियार सिर्फ़ अल्लाह को है।
सूद मुरक्कब(चक्रवृद्धि ब्याज ) की हुरमत।
अहले ईमान के लिए कीमती हिदायत।
मुत्तक़ी कौन हैं ?
दायत के हुसूल के लिए ज़रिये 1. तारीख से इब्रत 2. आयात - ए- क़रआनी से फ़ैज़(फ़ायदा )।
मुसलमानों के उरूज(ग़ल्बा) की शर्त ईमान है।
अहले ईमान हिम्मत ना हारना।
वाबस्तगी नबी की हयात से नही उनके मिशन से रखो।
मौत का समय तय है।
अल्लाह वाले अल्लाह की राह में जंग करते हैं।
काफ़िरों का मिशन ....मुसलमानों को ईमान की दौलत से महरूम करना।
नज़म की ख़िलाफ अर्ज़ी (ढिसिपलिन तोडना)....जीत हार में बदल गई।
मुश्किलों पर मुश्किलों की हिकमत।
मौत का वक्त ही नहीं ,जगह भी तय है।
बुज़दिली गुनाहों की वजह से पैदा होती हैं।
अल्लाह के रास्ते में मौत इस दुनिया और इसमें जो भी है उससे बहतर है
अमीर-ए-कारवाँ के लिए हिदायात।
असल फैसला करने वाली चीज़ अल्लाह की मदद हैं।
नबी ﷺ की दियानतदारी इखलास से भरपूर है।
नबी ﷺ ने सालिहीन की जमात कैसे तैयार की?
उहद में हार की वजह और हिकमत।
शहीदों के लिए इनाम।
ज़ख्मों से चूर सहाबा इक्राम रज़ि अल्लाहु अनहुम की बहादुरी और साहस।
आज़माइश मोमिन और मुनािफ़िक़ को जुदा कर देती हैं।
बुख़ल ( कन्जूसी) कयामत के दिन गले का फन्दा होगा।
3. पूरी सूरह का खुलासा और एक अज़ीम दुआ। यहूद की गुस्ताखियॉं और झूठ।
असल कामियाबि जहन्नम से निजात(छुटकारा) है।
अल्लाह की राह में आजमाइशें होगी।
अहले किताब की अल्लाह की किताब के साथ बेवफाई।
तारीफ़ और तहसीन की ख्वाहिश अज़ाब से दो चार कर देगी।
कायनात की तख़लीक़ पर गौर करना अल्लाह की मारिफ़त का ज़रिया है।
लूक-ए-क़ुरआनी.............ज़िक्र-ओ- फ़िकर।
तकमीले ईमान और ईमान अफ़्रोज़ दुआएं।
अफलाक से आता है नालों का जवाब आख़िर।
काफ़िरों की सरगरमियों का असर ना लो।
अहले किताब में भी सालिहीन हैं।
आख़िरत की कामयाबी के लिए चार हिदायात।
×